बापू तुझे नमन

हाथ में लाठी, आँखों में चश्मा,
बढ़ता था वो जैसे कोई करिश्मा ।
गांधीनगर से शुरू, भारत छोड़ो पर रुका,
बुढ़ापा आ गया पर सिर न झुका ।

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